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Kobita Hindi

आशे !

✍️ রচয়িতা: हरिवंशराय बच्चन 👁️ পাঠ সংখ্যা: 40 📅 প্রকাশিত: 12 Oct, 2026
(१) भूल तब जाता दुख अनन्त, निराशा पतझड़ का हो अन्त हृदय में छाता पुन: वसन्त, दमक उठता मेरा मुख म्लान देवि ! जब करता तेरा ध्यान । (२) पथिक जो बैठा हिम्मतहार, जिसे लगता था जीवन भार, कमर कसता होता तैयार, पुन: उठता करता प्रस्थान, देवि ! जब करता तेरा ध्यान । (३) डूबते पा जाता आधार, सरस होता जीवन निस्सार, सार मय फिर होता संसार, सरल हो जाते कार्य महान, देवि ! जब करता तेरा ध्यान । (४) शक्ति का फिर होता संचार, सूझ पड़ता फिर कुछ-कुछ पार, हाथ में फिर लेता पतवार, पुन: खेता जीवन जल यान, देवि ! जब करता तेरा ध्यान ।

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